Thursday, March 7, 2013

कुछ बातें,,,कुछ यादें


कुछ बातें मेरे बचपन की..
कुछ यादें तेरे बचपन की..
कुछ बचपन सा था बस गुज़र गया..
कुछ खुशियां थीं जो याद रहीं..
कुछ गम भी थे जो भूल गए..
कुछ शख्स जो दिल में बस गए..
कुछ लोग भी हमसे पीछे छूट गये..
अब लौट के कब फ़िर आयेंगे..
कुछ लम्हे थे जो बीत गये..
कुछ किस्से अभी भी बनने हैं..
कुछ कहानी अभी भी बाकी है..
कुछ बातें मेरे बचपन की..
कुछ यादें तेरे बचपन की..

मत्स्यगंधा

http://ceciliawyu.files.wordpress.com/2012/05/c-elinros-henriksdotter-art.jpg?w=547&h=790
जिस्म क्या है, रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिए
आप भी इस भीड़ में घुसकर तमाशा देखिए...

बदल सकती है, जो इस मौसम का मिजाज़
उस जवान चेहरे की हताशा देखिए...

जल रहा है मुल्क, ये बहला रही है क़ौम को
किस क़दर अश्लील है हुक्मरानों की भाषा देखिए...

मत्स्यगंधा फिर कोई होगी किसी का शिकार
दूर तक फैला हुआ गहरा कुहासा देखिए...